बहुत समय पहले की बात है, एक शांत और हरी-भरी घाटी में एक नीली नदी बहा करती थी। उस नदी के किनारे एक पुराना, फैला हुआ जामुन का पेड़ था, जिसकी शाखाएँ नदी के ऊपर तक झुकी हुई थीं। इस पेड़ पर एक समझदार और फुर्तीला बंदर रहता था, जिसका नाम था 'चीकू'। चीकू अकेला था, लेकिन खुश था। वह जामुन खाता, शाखाओं पर कूदता, और पानी में अपनी परछाई देखकर खुश हो जाता।
उसी नदी में एक मगरमच्छ रहता था — ‘भूधर’। भूधर बड़ा था, ताकतवर था, लेकिन बहुत चालाक भी था। वह शिकार करता और कभी-कभी नदी के किनारे धूप में आराम करता।
एक दिन भूधर को जामुन की मीठी खुशबू आई। वह पेड़ के नीचे आया और ऊपर देखा। चीकू उस समय शाखा पर बैठा फल खा रहा था।
भूधर ने कहा, “अरे बंदर भाई, क्या तुम मुझे एक जामुन दोगे? इसकी खुशबू बहुत लाजवाब है।”
चीकू ने मुस्कराकर कहा, “क्यों नहीं, मित्र! यह पेड़ सबका है।” और उसने एक मीठा जामुन नीचे गिरा दिया।
भूधर ने खाया और उसकी आँखें चमक उठीं।
“वाह! ऐसा मीठा फल मैंने जीवन में नहीं खाया।”
इसके बाद यह रोज़ का सिलसिला बन गया। भूधर रोज़ आता, और चीकू उसे फल देता। धीरे-धीरे दोनों में दोस्ती हो गई। वे एक-दूसरे से जीवन की बातें करने लगे — भूधर नदी की गहराई के किस्से सुनाता, और चीकू जंगल की ऊँचाई की कहानियाँ।
एक दिन भूधर ने कहा, “चीकू, तुम बहुत अच्छे दोस्त हो। मैं चाहता हूँ कि तुम मेरी पत्नी से भी मिलो। वह भी तुम्हारे जामुनों की तारीफ करती नहीं थकती।”
चीकू थोड़ा झिझका, “लेकिन मैं तो तैर नहीं सकता।”
भूधर बोला, “चिंता मत करो! मेरी पीठ पर बैठ जाना, मैं तुम्हें ले चलूँगा।”
चीकू थोड़ा डरा, लेकिन फिर दोस्ती पर भरोसा करके मान गया।
भूधर की पत्नी ‘धरा’ भूधर की जामुन की कहानियों से बहुत प्रभावित थी। लेकिन एक दिन वह बोली, “अगर जामुन इतना मीठा है, तो वह बंदर जो रोज़ खाता है, उसका दिल कितना मीठा होगा! मुझे वो दिल चाहिए।”
भूधर चौंका, “क्या! वह मेरा दोस्त है।”
धरा बोली, “अगर तुम सच में मुझसे प्यार करते हो, तो उसका दिल लाकर दो। मुझे वही उपहार चाहिए।”
भूधर उलझ गया। एक ओर उसकी पत्नी थी, और दूसरी ओर उसका दोस्त।
पर अंत में वह पत्नी के कहने पर झुक गया। उसने योजना बनाई — चीकू को नदी के बीच ले जाकर डुबा देगा और उसका दिल निकालकर पत्नी को देगा।
अगले दिन भूधर मुस्कराते हुए आया, “चीकू भाई! आज चलो, तुम्हें अपनी दुनिया दिखाता हूँ।”
चीकू बहुत खुश हुआ और भूधर की पीठ पर बैठ गया।
जब वे नदी के बीच पहुँचे, भूधर धीरे से बोला, “मुझे क्षमा करना मित्र, लेकिन मैं तुम्हें मारने जा रहा हूँ। मेरी पत्नी तुम्हारा दिल खाना चाहती है। मैं मजबूर हूँ।”
चीकू चौंक गया, पर घबराया नहीं।
उसने तुरन्त कहा, “अरे, तुमने पहले क्यों नहीं बताया? मैंने तो दिल पेड़ पर ही छोड़ दिया! मैं जब नदी में आता हूँ, तो दिल शाखा में टांग देता हूँ ताकि भारी न हो।”
भूधर थोड़ा हैरान हुआ, “क्या? तुम दिल बाहर निकाल सकते हो?”
चीकू ने सिर हिलाया, “हम बंदर ऐसे ही होते हैं। चलो वापस चलते हैं, मैं दिल ले आता हूँ।”
भूधर ने उसे वापस पेड़ पर छोड़ा।
जैसे ही चीकू पेड़ पर चढ़ा, वह तेजी से ऊँची शाखा पर पहुँच गया और चिल्लाया, “मूर्ख मगरमच्छ! क्या कोई अपना दिल बाहर निकालता है?”
भूधर लज्जित हो गया। उसने अपनी मूर्खता को समझा।
“मुझे माफ़ कर दो चीकू! मैंने तुम्हारी दोस्ती के साथ धोखा किया।”
चीकू ने गम्भीर होकर कहा, “मैं दोस्ती को बहुत मानता हूँ। लेकिन अब मैं तुम पर भरोसा नहीं कर सकता। जाओ, और कभी लौट कर मत आना।”
इस घटना के बाद चीकू ने जंगल में एक सभा बुलाई। वहाँ उसने सबको यह कहानी सुनाई। जानवरों को यह जानकर झटका लगा कि भूधर जैसा समझदार दिखने वाला मगरमच्छ भी इतना लालची और धोखेबाज़ हो सकता है।
सभा में निर्णय लिया गया कि नदी में जाने से पहले सब जानवर सावधानी बरतेंगे। चीकू को जंगल का सलाहकार नियुक्त किया गया।
अब वह न केवल जामुन खाता था, बल्कि दूसरों को भी समझदारी से जीने की राह दिखाता था।
भूधर लौट गया, लेकिन वह अंदर से बदल गया था। उसने अपनी पत्नी को सच बताया और कहा, “मैंने एक नेक दिल वाले दोस्त को खो दिया। अब मैं कभी किसी पर ज़ुल्म नहीं करूँगा।”
धरा ने भी अपनी गलती मानी।
चीकू और भूधर फिर कभी नहीं मिले, लेकिन चीकू की कहानी पीढ़ी दर पीढ़ी जंगल में सुनाई जाती रही।
कहानी से शिक्षा:
दोस्ती में सबसे बड़ी चीज़ है — विश्वास।
चतुराई से बड़ी कोई शक्ति नहीं।
लालच, चाहे किसी का भी हो, अंततः सब कुछ नष्ट कर देता है।

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