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बुद्धि की विजय | victory of intellect


बहुत समय पहले की बात है, एक घना और हरा-भरा जंगल था, जिसका नाम था "हरितवन"। इस जंगल में अनेक प्रकार के पशु-पक्षी, जीव-जंतु शांति से रहते थे। लेकिन इस जंगल का राजा, सिंहराज विक्रम, अपनी ताकत और क्रूरता के लिए कुख्यात था। उसका स्वभाव अत्यंत कठोर और निर्दयी था।

विक्रम को प्रतिदिन एक जानवर का शिकार चाहिए होता था, और वह जंगल के सारे जानवरों को डरा कर रखता था। जानवरों ने कई बार उसका विरोध करने की कोशिश की, लेकिन उसकी शक्ति के आगे सब विवश थे।

एक दिन, जानवरों ने सभा बुलाई। हाथी, हिरण, लोमड़ी, बंदर, और अन्य सभी प्राणी इकट्ठा हुए। उन्होंने तय किया कि हर दिन एक-एक जानवर अपनी बारी से स्वयं शेर के पास जाएगा, जिससे बाकी प्राणियों की जान बच सके। यह फैसला दुखद था, लेकिन उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था।


उसी जंगल में एक छोटा सा खरगोश भी रहता था, जिसका नाम था चिंटू। चिंटू छोटा जरूर था, लेकिन उसकी बुद्धि बहुत तेज थी। वह हमेशा कुछ नया सोचता और करता रहता था। उसे यह व्यवस्था बिल्कुल भी पसंद नहीं थी कि डर के कारण जानवर अपनी जान कुर्बान कर रहे हैं।

एक दिन, जब खरगोश की बारी आई शेर के पास जाने की, तो वह डर तो गया लेकिन उसने ठान लिया कि वह कुछ अलग करेगा। उसने अपने दिमाग की ताकत पर भरोसा किया।

चिंटू ने घर से निकलने में देर कर दी। वह जानबूझकर बहुत धीमे चला, रास्ते में मिट्टी में लोटा, झाड़ियों में छिपा और इस तरह से वह शेर के पास देर से पहुँचा।


जब चिंटू दोपहर के बाद शेर की गुफा के पास पहुँचा, तो विक्रम आग-बबूला हो रहा था। उसकी आँखों से जैसे अंगारे निकल रहे थे।

"तुम इतनी देर से क्यों आए हो?" शेर दहाड़ा।

चिंटू काँपता हुआ बोला, "महाराज, मैं समय पर ही आ रहा था, लेकिन रास्ते में एक और शेर मिल गया... उसने कहा कि अब से वही जंगल का राजा होगा और वह मुझे खा जाएगा। किसी तरह मैं उससे बच कर आपके पास आया हूँ।"

शेर सुनकर और गुस्से में आ गया। “क्या? मेरे जंगल में दूसरा शेर? मुझे चुनौती दे रहा है?” शेर गरजते हुए उठा, “मुझे अभी ले चलो उसके पास!”

चिंटू चुपचाप मुस्कराया और बोला, “आइए महाराज, मैं आपको उसी जगह ले चलता हूँ।”


चिंटू शेर को जंगल के अंदर स्थित एक गहरी झील के पास ले गया। वहाँ उसने इशारा किया, “महाराज, वह रहा वो शेर... झील के अंदर, देखिए!”

विक्रम ने झील में झाँका और देखा – पानी में उसका ही प्रतिबिंब था, लेकिन गुस्से में होने के कारण वह समझ नहीं पाया और उसे लगा कि वास्तव में दूसरा शेर है जो उसे घूर रहा है।

गुस्से में आकर विक्रम ने झील में छलांग लगा दी और बहुत देर तक छटपटाता रहा। लेकिन वह झील बहुत गहरी थी, और शेर तैरना नहीं जानता था। अंततः वह झील में डूब गया।


जब बाकी जानवरों को यह पता चला कि शेर अब इस दुनिया में नहीं रहा, तो पूरा जंगल खुशी से झूम उठा। जानवरों ने चिंटू को अपनी बुद्धिमानी और साहस के लिए सम्मानित किया।

अब जंगल में कोई डर नहीं था, कोई हिंसा नहीं थी। सब जानवर मिल-जुलकर रहने लगे और हरितवन फिर से आनंदमय हो गया।

चिंटू को जानवरों ने जंगल का "बुद्धिराज" घोषित किया। अब हर निर्णय के लिए चिंटू की सलाह ली जाती थी। वह अपनी चतुराई और विनम्रता से सबका विश्वास जीत चुका था।

नैतिक शिक्षा:   "बल से नहीं, बुद्धि से ही सच्ची विजय होती है।"

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