झरनों और पहाड़ों के बीच बसा एक छोटा सा गांव था – “चित्रापुर।” यहां का सबसे बड़ा रहस्य था – नीली झील । झील का पानी आसमानी नीला था, इतना साफ कि नीचे की मछलियाँ भी गिनी जा सकती थीं। पर गांववालों का कहना था कि रात के समय झील से अजीब रोशनी निकलती है और कभी-कभी रहस्यमयी आवाजें भी आती हैं। बच्चों को वहाँ जाने से सख्त मना किया जाता था। लेकिन "अर्जुन" को रहस्य पसंद थे। वह 13 साल का तेज़, जिज्ञासु और साहसी लड़का था। उसके दो दोस्त थे – गोलू , जो खाने का शौकीन था, और रिया , जो किताबों की दीवानी थी। अर्जुन ने कहा, “मुझे लगता है नीली झील में कोई वैज्ञानिक रहस्य छिपा है। भूत-प्रेत की बातें बस डराने के लिए हैं।” रिया बोली, “हम एक योजना बनाते हैं। दिन में झील का मुआयना करेंगे और फिर रात को छुपकर वहाँ जाएंगे।” गोलू ने डरते हुए कहा, “अगर भूत सच में हुए तो?” अर्जुन मुस्कुराया, “तो उन्हें गोलगप्पे खिला देंगे!” तीनों दोस्त दिन के समय झील के किनारे पहुँचे। वहां बहुत शांति थी। कुछ मछुआरे जाल डाल रहे थे लेकिन कोई भी झील के बीच में नहीं जा रहा था। रिया ने दूरबीन से देखा – झील के बीचों-बीच...
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